अमेरिका में ग्रीन कार्ड नियम होंगे सख्त, ‘पब्लिक चार्ज’ का नया प्रावधान भारतीयों के लिए क्यों बढ़ा सकता है मुश्किलें?

वॉशिंगटन: अमेरिका में स्थायी रूप से बसने और ग्रीन कार्ड हासिल करने की तैयारी कर रहे भारतीयों के लिए आव्रजन नियमों में प्रस्तावित बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है। ट्रंप प्रशासन के ‘पब्लिक चार्ज’ नियमों से जुड़ी नई गाइडलाइन 18 सितंबर 2026 से लागू होने की बात कही गई है। इसके बाद सरकारी सहायता पर निर्भरता की आशंका समेत आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, परिवार, वित्तीय संसाधन, शिक्षा और कौशल जैसे पहलुओं को अधिक व्यापक तरीके से जांचा जा सकता है।

क्या है ‘पब्लिक चार्ज’ नियम?

‘पब्लिक चार्ज’ ऐसे व्यक्ति को कहा जाता है जिसके बारे में अमेरिकी अधिकारी यह मान सकते हैं कि वह अपनी आजीविका के लिए भविष्य में सरकारी सहायता पर निर्भर रहने की संभावना रखता है। ग्रीन कार्ड के आवेदन की समीक्षा के दौरान यदि अधिकारियों को ऐसा लगता है कि आवेदक अमेरिकी सरकार की आर्थिक मदद या कुछ सुविधाओं पर निर्भर हो सकता है, तो उसकी पात्रता पर सवाल उठ सकते हैं।

नए दिशा-निर्देश उन भारतीयों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, जो रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लंबे बैकलॉग में हैं और अब फॉर्म आई-485 दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।

18 सितंबर से किन लाभों की जांच हो सकती है?

पहले बाइडेन प्रशासन के दौरान लागू नियमों में कुछ गैर-नकद लाभों को पब्लिक चार्ज आकलन से बाहर रखा गया था। इनमें खाद्य सहायता, आवास सहायता और मेडिकेड जैसी सुविधाएं शामिल थीं। नई व्यवस्था में इन लाभों को लेकर मूल्यांकन का दायरा सख्त होने की बात कही गई है।

18 सितंबर 2026 या उसके बाद यदि कोई आवेदक खाद्य सहायता कार्यक्रम, किराया सहायता, मेडिकेड या बच्चों के स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम जैसी आय-आधारित सरकारी सुविधाओं का लाभ लेता है, तो अधिकारी इसे अपनी समीक्षा में शामिल कर सकते हैं।

सिर्फ सरकारी मदद लेने से आवेदन खारिज नहीं होगा

हालांकि, सरकारी सहायता लेने भर से ग्रीन कार्ड आवेदन स्वतः खारिज नहीं हो जाएगा। अधिकारियों की ओर से आवेदक की पूरी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर समग्र मूल्यांकन किया जाएगा।

इस समीक्षा में आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, संपत्ति और वित्तीय संसाधन, शिक्षा तथा कौशल जैसे पहलुओं को देखा जा सकता है। इसके अलावा भविष्य में रोजगार की संभावना, नौकरी का प्रस्ताव और संभावित वेतन से जुड़े दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।

भारतीय पेशेवरों पर क्या होगा असर?

रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है। खासकर वे लोग जो अब फॉर्म आई-485 दाखिल करने की तैयारी में हैं, उन्हें अपनी वित्तीय स्थिरता, रोजगार और भविष्य की आय से जुड़े दस्तावेजों को अधिक व्यवस्थित रखना पड़ सकता है।

हालांकि, सामान्य एच-1बी प्रक्रियाओं को इससे सीधे प्रभावित नहीं किया गया है। एच-1बी विस्तार, संशोधन, नियोक्ता बदलने और एच-4 विस्तार या स्थिति बदलने जैसे मामलों को पब्लिक चार्ज के दायरे से बाहर रखा गया है।

लेऑफ के बाद भारतीयों की चिंता बढ़ी

अमेरिका के तकनीकी और अन्य क्षेत्रों में हाल की छंटनी के बीच भारतीय समुदाय में भी इस नियम को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि, केवल नौकरी चले जाने से किसी व्यक्ति को पब्लिक चार्ज घोषित नहीं किया जाएगा।

फिर भी अधिकारी आवेदक के पिछले रोजगार, वेतन, कौशल और नई नौकरी हासिल करने की संभावनाओं की गहराई से समीक्षा कर सकते हैं। ऐसे में रोजगार की स्थिति और भविष्य की आय से जुड़े प्रमाण महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

बुजुर्ग माता-पिता के लिए बढ़ सकती है चुनौती

इमिग्रेशन विशेषज्ञ साइरस डी. मेहता के अनुसार, नए नियमों का अधिक असर उन बुजुर्ग माता-पिता पर पड़ सकता है जिन्हें उनके बच्चे अमेरिका में स्पॉन्सर कर रहे हैं। खासकर ऐसे मामलों में जहां माता-पिता स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हों और स्पॉन्सर नए मानदंडों को पूरा करने की स्थिति में न हो।

आवेदन अटकने पर बॉन्ड का विकल्प

यदि किसी अधिकारी को पब्लिक चार्ज के आधार पर आवेदक की पात्रता को लेकर समस्या नजर आती है, तो कुछ परिस्थितियों में आवेदक को पब्लिक चार्ज बॉन्ड जमा करने का विकल्प दिया जा सकता है।

यह एक तरह की वित्तीय गारंटी होती है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवेदक भविष्य में सरकारी सहायता पर निर्भर न हो। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था पांच वर्षों की अवधि से जुड़ी हो सकती है और निर्धारित शर्तें पूरी होने पर स्थिति बदलने के आवेदन को मंजूरी मिल सकती है।

नए प्रावधानों के चलते अमेरिका में कानूनी तरीके से स्थायी रूप से बसने की प्रक्रिया अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों के लिए वित्तीय स्थिति, रोजगार से जुड़े प्रमाण और आव्रजन दस्तावेजों को व्यवस्थित रखना महत्वपूर्ण होगा।

 

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